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वाशिंगटन डीसी से प्रधानमंत्री नेतन्याहू का बयान

प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू, वाशिंगटन डी.सी. से (हिब्रू से अनुवादित):

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नेतन्याहू का अमेरिका दौरा: गाज़ा, ईरान और बंधकों की रिहाई पर अहम बयान

वाशिंगटन डी.सी. से प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ ऐतिहासिक जीत के बाद अपने दौरे के अंतिम दिन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ गाज़ा, क्षेत्र और उससे आगे के मुद्दों पर हुई सहमति पर बाद में चर्चा होगी।

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और दुखद नुकसान

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने गुश एत्ज़ियोन में मारे गए व्यक्ति के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बड़ी सफलताएं मिली हैं, लेकिन दुखद नुकसान भी हुआ है। उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति पूरे इज़राइल की ओर से संवेदनाएं व्यक्त कीं।

बंधकों की रिहाई और युद्धविराम की मांग

नेतन्याहू ने बंधकों के परिवारों से मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि वे सभी बंधकों को वापस लाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 60 दिनों के अस्थायी युद्धविराम के बदले में जीवित और मृत बंधकों में से आधे को रिहा कराने का प्रयास किया जा रहा है। इस युद्धविराम के दौरान, युद्ध की स्थायी समाप्ति पर बातचीत शुरू होगी। उनकी मुख्य शर्तें हैं: हमास अपने हथियार डाल दे, गाज़ा का विसैन्यीकरण हो और हमास की कोई भी शासकीय या सैन्य क्षमता न रहे।

ईरान का परमाणु खतरा और सैन्य कार्रवाई

प्रधानमंत्री ने ईरान के परमाणु खतरे को दूर करने के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यदि 60 दिनों की बातचीत से यह संभव नहीं हुआ, तो इसे अन्य तरीकों से हासिल किया जाएगा। उन्होंने सेना की ताकत का इस्तेमाल करने की बात कही।

चुनौतियां और सैन्य अभियान

नेतन्याहू ने स्वीकार किया कि यह एक ऐसी युद्धभूमि है जिसका सामना दुनिया की किसी भी सेना ने नहीं किया है। उन्होंने कहा कि सैनिकों की वीरता और बलिदान से हमास की अधिकांश सैन्य क्षमता को नष्ट कर दिया गया है, लेकिन अभी भी हजारों सशस्त्र लड़ाके बाकी हैं। उन्होंने कूटनीति और सैन्य बल के संयोजन से मिशन को पूरा करने की बात कही।

उन्होंने अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का भी जिक्र किया, जैसे कि रफ़ाह में प्रवेश न करने और फ़िलाडेल्फ़ी कॉरिडोर पर कब्ज़ा न करने की सलाह। उन्होंने कहा कि इन बाधाओं को पार कर लिया गया है और अब वे इस कदम को पूरा करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों में, एक अत्यंत साहसी सैन्य अभियान के साथ-साथ, वे गाज़ा पट्टी में आगे बढ़ रहे हैं और मृत बंधकों को भी वापस ला रहे हैं।

दृढ़ संकल्प और भविष्य की कार्रवाई

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले युद्धविराम के बाद वे युद्ध में लौटे थे, दूसरे के बाद भी लौटे थे, और अब तीसरे युद्धविराम के बाद भी वे लड़ना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। यदि हमास की क्षमता का विसैन्यीकरण और विनाश बातचीत से हो जाता है, तो यह बेहतर होगा, लेकिन किसी भी तरह से यह हासिल किया जाएगा।

बंधकों की रिहाई के क्रम पर पूछे गए सवालों पर उन्होंने कहा कि सबसे पहले बंधकों को रिहा किया जाना चाहिए। उन्होंने हमास को एक क्रूर आतंकवादी संगठन बताया और कहा कि वे सभी को बचाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वे इस रिहाई को सर्वोत्तम संभव तरीके से अधिकतम करने के लिए सब कुछ करेंगे, लेकिन सब कुछ उनके हाथ में नहीं है।

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